Wednesday, 9 August 2017

Motivation story श्रीनिवासन रमन की जीवन कहानी your first success




एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अपने मेहनत से बहुत ऊंचे पद तक पहुंचे भले ही उनके सामने बहुत से कष्ट आये लेकिन न उन्होंने पीछे नहीं हटे नीचे पढिये इनकी पूरी जीवन कहानी|

जीवन कितना संघर्ष मय कितना कठिन हो सकता है यह इस कहानी से पता चलेगा कल्याण रमन श्रीनिवासन का जन्म एवं लालन पालन तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के छोटे से गांव मन आरा कोइल एक मध्यम श्रेणी के साधारण परिवार में हुआ इसके पिता तहसीलदार थे सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक उसके पिता का देहांत हो गया उस समय कल्याण रमन की उम्र मात्र 15 वर्ष थी उसकी माता को मात्र 420 रुपए पेंशन मिलने लगी रुपए 420 में चार बच्चों एवं स्वयं माताजी का गुजारा कैसे चलता होगा सोचा जा सकता है पिता की आसामयिक मृत्यु के बाद घर के हालात बहुत बदतर हो गए थे किराए का मकान छोड़कर बिना बिजली एवं  पानी  के कनेक्शन की एक झोपड़ी में परिवार को रहना पड़ा गांव की लैंप पोस्ट की लाइट में बच्चे पढ़ाई करते थे उस समय एम जी रामचंद्र तमिलनाडु के मुख्यमंत्री होते हैं|



कल्याण रमन शब्दों में हम अपने लिए चावल खाने की व्यवस्था करने के लिए दिन में प्लेट्स बेचते से हमारी माता जी हमें हाथों में देती थी इतनी खराब स्थिति थी हमारी माताजी आठवीं कक्षा पास थी वह हमारी पढ़ाई के संबंध में बहुत चिंतित रहती थी कि रिश्तेदार ने हमारे बड़े भाई को पिता की ऐवज मैं मिलने वाली एक छोटी सी सरकारी नौकरी करने का सुझाव दिया लेकिन हमारी माता जी ने उसे स्वीकार नहीं किया हमारी माता जी पढ़ाई पूरी कराने हेतु संकल्पित थी कल्याण रमन अपने बचपन को याद करते हुए बताता है कि वह अपनी माता जी को यह कहता था कि एक दिन आपको इतने रूपए दूंगा कि गिन भी नहीं पाओगे और यह बात कल्याण रमन ने सत्य का दिखायी जैसे-जैसे बारवीं पास करने के बाद रमन ने अन्ना यूनिवर्सिटी चेन्नई से इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया रमन को मेरिट स्कालरशिप मिलनी शुरु हो गई लेकिन स्कॉलरशिप की राशि बहुत देर से मिलती थी


मेस मे नियम था कि यदि आप मैस के पैसे जमा नहीं करा सकती तो आप मेस मे खाना नहीं खा सकते मेस की फीस रुपए 250 प्रतिमा थी कल्याण रमन अपने दोस्तों की खाने से या व्रत करके अपना जीवन चला करता था पैसे की इतनी तंगी थी कि अंतिम सेमेस्टर से पहले वह डेढ दिन से भूखा था और परीक्षा के बाद बेहोश हो गया दूसरे दिन उसकी सारी स्कॉलरशिप राशि रुपए 5000 का चेक मिला वाह यह राशि लेकर अमीर की तरह घर गया जिससे उधार भुगतान किया|


कल्याण रमन ने प्रथम नौकरी TCE (TATA CONSULTING ENGINEERING)  मुंबई में शुरू की सुबह दादर रेलवे स्टेशन के बाथरुम में नहा कर जगवा ऑफिस पहुंचा तो मैनेजर ने उसे टोका की हवाई चप्पल पहनकर आप कल ऑफिस नहीं आओगे कल्याण रमन ने कहा कि ऐसा संभव नहीं है तो मैनेजर नाराज हो गया लेकिन जब रमन ने बताया कि जब उसे वेतन नहीं मिलेगा तब तक वह आर्थिक कारण से ऐसा करने में असमर्थ हैं यह जानकर मैनेजर ने उसे एक माह का वेतन एडवांस दे दिया तथा उसका रहने का प्रबंध अपने किसी परिचित के यहां कराया उस प्रथम वेतन से रुपए 1500 दूसरे दिन रमन ने अपनी मां के पास भेज दिए|


जल्दी ही रमन को मुंबई से बेंगलुरु भेज दिया गया और फिर वह tcs टाटा कंसल्टेंसी चेन्नई पहुंच गया वहां से  UK EDINBURGH UCOPS EDUNBURGH से USA वर्ष 1992 मैं उसने usa में  एकॉन ट्रैक्टर की तरह वॉल मार्ट मैं ज्वाइन किया 2 वर्ष के अंदर रमन एक डिवीजन का डायरेक्टर बन गया जब 6 वर्ष बाद उसने वॉल मार्ट छोड़ा तो रमन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वॉलमार्ट के इंफॉर्मेशन सिस्टम का इंचार्ज था वर्ष 1998 में रमन ने ड्रग्स store.com ज्वाइन किया और वर्ष 2001 मे इसी कंपनी का CEO बन गया|

उसने अपने आसपास के सभी अनाथ बच्चों को भी गोद लिया है कोई भी बच्चा यदि आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ने में असमर्थ है तो उसके लिए कल्याण रमन के दरवाजे हमेशा खुले हैं कल्याण रमन का कहना है कि मैं समाज को थोड़ा बहुत ही दे पा रहा हूं लेकिन मुझे समाज से बहुत कुछ मिला है वह अपने माता जी एवं ईश्वर को अपनी असफलता के लिए पूरा श्रेय देता है|

यह है महान व्यक्ति जिन्होंने  कई कष्टों का सामना कर अपनी मंजिल को पाया उनको गरीबी का एहसास भी है तभी वे आज भी गरीब बच्चों की सहायता करते हैं|

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