Thursday, 10 August 2017

महिलाओं की शान सुरेखा यादव की संघर्षमय जीवन कहानी Yourfirstsuccess




 मैं आज आपको एक ऐसी  महिला  की जीवन कहानी का वर्णन करना चाहता हूं जिन्होंने अपनी  इच्छाशक्ति से दुनिया को यह बता दिया भारतीय  नारी भी किसी से कम नहीं इसके लिए आपको यह कहानी पूरा पढ़ना होगा मैं आज इनकी बारे में विस्तार से बताने की कोशिश करूंगा

 महाराष्ट्र के सातारा जिले में एक किसान परिवार में जन्मी सुरेखा यादव एक गरीब परिवार से हैं गरीबी की बावजूद  जब पिता ने इस की इच्छा अनुसार इंजीनियरिंग में   प्रवेश दिलाया तो अधिकांश लोगों ने उन  पर  उंगली उठाई एवं उसे हताश करने का तरह-तरह से प्रयास किया कम ही लोग थे जो उसे प्रोत्साहित करते थे|


 सुरेखा का कहना है कि उसने तय कि  उसे इन  सब बातों पर ध्यान नहीं देना है एवं पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाना है सुरेखा वर्ष 1994 में भारतीय रेल से जुड़ने के बाद  वर्ष 1996 मे  कल्याण से  बोरी बंदर माल गाड़ी चला कर पूरे एशिया में  प्रथम महिला रेल ड्राइवर बनी एवं लोगों के इस मिथक को तोड़ दिया कि महिला रेलगाड़ी नहीं चला सकती|



 सुरेखा का मानना है कि दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो सिर्फ या तो महिला ही कर सकती है या पुरुष कर सकते हैं  पुरुषों एवं महिलाओं मे लगभग समान क्षमता होती है बस यह उनको सोचना होता है कि वह क्या काम करना चाहते /चाहती हैं वर्ष 2010 में सुरेखा घाट ड्राइवर गई सुरेखा अपने जीवन में इस बात को बहुत महत्व देती है की महिलाओं के लिए कोई  भी कार्य वर्जित नहीं है|



 वर्तमान में सुरेखा मुंबई स्थित ट्रेनिंग स्कूल में  ट्रेनों के ड्राइवरों कोचिंग  दे रही है सुरेखा यादव को वुमेन अचिवर्स  अवार्ड 2011 एसबीआई  प्लेटिनम शुक्ल ईयर  अवार्ड एवं अन्य कई अवार्ड मिल चुके हैं सुरेखा यादव ने लीक से हटकर ऐसा कार्य किया जिसने ना केवल उसका स्वयं का बल्कि भारत देश का नाम दुनिया में रोशन किया है|



  भारत की शान को बढ़ाने वाली  महिला जिन्होंने ना केवल भारत का नाम रोशन किया बल्कि महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा बन गई उन्होंने यह साबित कर दिखाया  महिलाएं भी किसी पुरुषों से कम नहीं है|

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